गोगा नवमी पर रतलाम में दिखी गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत तस्वीर हिंदू-मुस्लिम समाज ने मिलकर दिया एकता और भाईचारे का संदेश
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रतलाम/ D I T NEWS :- शहर सहित पूरे अंचल में गोगा नवमी का पर्व परंपरागत श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। वाल्मीकि समाज की ओर से निकाले गए गोगादेव जी की छड़ियों, झांकियों और अखाड़ों के भव्य चल समारोह ने पूरे शहर को भक्तिमय कर दिया। आयोजन की सबसे खास बात हाट की चौकी चौराहे पर देखने को मिली, जहां मुस्लिम समाज ने खुले दिल से स्वागत कर हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की।

देर रात तक गूंजे जयकारे, जगह-जगह हुआ स्वागत
गोगा नवमी पर शाम से देर रात तक शहर की विभिन्न वाल्मीकि बस्तियों से चल समारोह निकाले गए। श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देव वीर गोगादेव जी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे इस समारोह के लिए जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं वाल्मीकि सेना द्वारा भगतों, छड़ियों और उस्तादों का सम्मान किया गया।

हाट की चौकी पर नजर आया सांप्रदायिक सौहार्द का खूबसूरत नजारा
गोगा नवमी के इस धार्मिक उत्सव के बीच हाट की चौकी क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। यहां मुस्लिम समाज के हजरत हुसैन अखाड़ा से भय्या कुरैशी, वसीम माया, व सय्यद हसन अली मित्रमंडल की ओर से गोगा नवमी के चल समारोह में शामिल छड़ियों, झांकियों और अखाड़ों के उस्तादों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

समाजजनों ने छड़ियों और अखाड़ों के उस्तादों को हार पहनाकर, साफा बांधकर तथा सम्मान स्वरूप शील्ड भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही राहगीरों और चल समारोह में शामिल लोगों के लिए पानी एवं शरबत की व्यवस्था भी की गई।
इस दौरान हाट के चौराहे का माहौल सिर्फ एक धार्मिक आयोजन का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी सम्मान और इंसानियत का संदेश देता नजर आया। एक ओर गोगादेव जी की आस्था में श्रद्धालु शामिल थे, तो दूसरी ओर मुस्लिम समाज के लोग आगे बढ़कर उनका स्वागत और सम्मान कर रहे थे।

यह दृश्य बताता है कि रतलाम की पहचान केवल उसके त्योहारों और परंपराओं से नहीं, बल्कि यहां की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे से भी है। अलग-अलग धर्म और परंपराओं के बावजूद एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होना ही समाज की खूबसूरती है।
हाट के चौराहे पर दिखाई दिया यह नजारा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और संदेश दे गया कि मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत, सम्मान और भाईचारा सभी को एक-दूसरे से जोड़ता है। गोगा नवमी के अवसर पर सामने आई यह तस्वीर रतलाम की साझा संस्कृति और सौहार्द की एक खूबसूरत मिसाल बन गई।
“मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिंदी हैं हम, वतन है हिंदुस्तान हमारा।”
इंसानियत और मोहब्बत का संदेश.....
धार्मिक आस्था के इस पर्व पर दोनों समुदायों द्वारा एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करते हुए खुशियां बांटने का यह दृश्य शहर में दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह आयोजन संदेश देता है कि धर्म अपनी जगह है, लेकिन इंसानियत और भाईचारा सबसे ऊपर है। यही भावना रतलाम की सामाजिक एकता को और मजबूत बनाती है।
यह चल समारोह शहर के विभिन्न चौराहो से होकर दो बत्ती चौराहे पर समापन हुआ जिसमें समाजजन के सभी लोग शामिल हुए

